यह आइडिया Monk-E नाम की कंपनी से आया है, जिसे विराज शेट और रणवीर अल्लाहबादिया ने शुरू किया था। उनका मानना है कि ऐसे लोग जो सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव रहते हैं, वही सबसे पहले नए ट्रेंड्स को पकड़ सकते हैं और उन्हें समझ सकते हैं। इसके लिए सिर्फ़ स्क्रॉलिंग नहीं, बल्कि क्रिएटर कल्चर की समझ, हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में पकड़ और साथ ही Basic Computer Skills जैसे स्प्रेडशीट का ज्ञान भी ज़रूरी है।
यह कदम इसलिए दिलचस्प है क्योंकि डिजिटल दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। हर दिन कोई नया मीम, नया वीडियो या नई ट्रेंडिंग रील सामने आती है। जो लोग दिनभर सोशल मीडिया पर रहते हैं, वो इन बदलावों को तुरंत नोटिस कर लेते हैं। यही वजह है कि कंपनी ऐसे लोगों को अपनी टीम में शामिल करना चाहती है। इस खबर के चलते कंपनी को लोगों के बीच काफी चर्चा और पब्लिसिटी भी मिल गई है।
हालाँकि, इसके कुछ नुक़सान भी हो सकते हैं। सिर्फ़ मोबाइल चलाना काफी नहीं है, बल्कि उससे सही आइडिया और इनसाइट्स निकालना ज़रूरी है। इसके अलावा रोज़ इतने लंबे समय तक स्क्रीन देखना किसी की मानसिक सेहत के लिए ठीक नहीं होता। और यह भी सवाल है कि क्या कोई लंबे समय तक सिर्फ़ स्क्रॉलिंग करते हुए काम कर सकता है।
फिर भी यह बात साफ है कि यह सोच थोड़ी अजीब भी है और उतनी ही स्मार्ट भी। अजीब इसलिए क्योंकि एक आदत, जिसे अक्सर लत कहा जाता है, अब नौकरी का रास्ता बन रही है। और स्मार्ट इसलिए क्योंकि कंपनियों को ऐसे लोगों की ज़रूरत है जो ऑडियंस की पसंद और ट्रेंड्स को सही तरह से समझ पाएं। तो अगर आपको कभी लगा कि आपका इंस्टाग्राम या यूट्यूब टाइम सिर्फ़ समय की बर्बादी है, तो अब सोचिए, शायद यही आदत आपको कल नौकरी दिला सकती है। फर्क सिर्फ़ इतना है कि स्क्रॉलिंग से कुछ नया सीखना और उसे काम में इस्तेमाल करना आना चाहिए।

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